Tuesday, September 28, 2010

सात हाथियों की मौत से बौखलाए मुख्य मंत्री


जलपाईगुड़ी जिले के मोराघाट चाय बगान के नजदीक मालगाड़ी के धक्के से हुई सात हाथियों की मौत से भले ही राज्य के मुख्यमंत्री शोकाहात हो , लेकिन केंद्र सरकार से उस रुट पर रात में ट्रेन ना चलाने की अर्जी देकर उन्होंने एक बार फिर डुआर्स को रेल सेवा से वंचित रखने की पहल की है। गौरतलब है की जिले के बानारहाट और बिन्नागुड़ी रेल स्टेशनों के बीच इस माह की २३ तारीख को तड़के मालगाड़ी के धक्के से सात हाथियों की मौत हो गयी थी। इस दुर्घटना में मौके पर ही सात हाथियों की मौत हुई थी जिसके बाद स्वयं को पर्यावरण प्रेमी कहने वाले संगठनो ने रेल मंत्रालय को जिम्मेदार ठहराते हुए भरसक आलोचना की थी किन्तु कोई भी यह कहने का साहस न उठा सका की इस घटना के लिए रेल मंत्रालय के साथ - साथ वन विभाग भी सामान रूप से दोषी है, क्यों की जब हाथियों का झुण्ड जंगल से निकल कर जन वस्तियों की और बढ रहा था तब वन विभाग के कर्मचारी कहाँ सो रहे थे। क्यों नहीं समय रहते रेल को इसकी सूचना दी गयी और इस घटना को बचाया जा सकता था।

दूसरी ओरपिछड़े इलाको की गिनती में आने वाले डूआर्स के विकाश की यात्रा हाल ही में शुरू हुई है इसके बाद भी राज्य के मुख्य मंत्री का ऐसाबयान यहाँ के लोगों के मन को दुखी करता है ।

Monday, July 5, 2010

भा ज प़ा और वाम पंथी दलों द्वरा महंगाई के विरुद्ध बुलाये गए बांध से आज पुरे भारत में अच्छा असर देखने को मिला । किन्तु सोछाने की बात है की इस बंद से भारत की आम जनता को क्या हासिल हुआ ? महंगाई कम हो या न हो किन्तु आज के बंद से भारत की अर्थ व्यवस्था को कितना नुकसान पहुंचेगा , और इस की भर पी भी सरकारें आम आदमी की जेब से ही करेगी। तो कुल मिलके बोझ तो आम आदमी के कन्धों पर ही आएगा।
बंद के बाद मुरली मनोहर जोशी और वाम पंथी नेता विमान बासु ने इस बंद को एतिहासिक करार देते हुए कहा की आम आदमी ने खुद ही इस बंद का समर्थन किया है , किन्तु सच्चाई इससे कोसो दूर है बंद समर्थको की गुंडा गर्दी और तोड़ फोड़ से डरी जनता ने आज सडकों par निकलने की कोशिश नहीं की । आज वक्त आ गया है की आम आदमी को यह फैसला लेना पड़ेगा की उनकी किस्मत और जीवन की दास्ताँ यह अपना मतलब साधने वाले नेता ही करेंगे या उनको खुद ही आगे आन की जरुरत है।
मेरी समझ के अनुसार आज देश की एक बड़ी आबादी युवाओं की है और देश को आगे लेन के लिए इसी tadad को आगे aane की जरुरत है.

Saturday, August 22, 2009

लगातार बारिश से बाढ़ की स्थिति




बचाव के लिए सेना बुलाई गई

जिले में लगातार हो रही बारिश से कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है । जिले के मैनागुडी इलाके में तिस्ता नदी का तटबंध टूट जाने से लगभग ८०० घर जल मग्न हो गए है। परिस्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने सेना की मदद लेने का फ़ैसला लिया है। सेना के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस के लिए २० पर्वतीय खंड के जवानो व अधिकारियों को बुलाया गया। निर्देश मिलते ही सेना ने इलाके में बचाव कार्य शुरू कर दिया जिसके तहत सेना ने इलाके में राहत शिविर लगा कर पीड़ित परिवारों को बाहर निकालने का काम शुरू कर दिया है । प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रभावितों को खाना व स्वास्थ सेवाएं भी मुहैया करवाने का काम सेना के जवान व अधिकारी कर रहे है । किंतु इलाके में लगातार हो रही वर्षा से बचाव कार्य में बाधाएं आ रही है।

Sunday, August 16, 2009

अरण्यक की मौत

आज एक बार फिर एक हाथी का शावक अपनी जिंदगी की जंग हार गया । लगभग एक साल सात महीने की उम्र वाले इस हाथी शावक की मौत कल रात १३३० बजे गोरुमारा अभयारण के धुपझोरा इलाके में हो गई । जिला वन दफ्तर के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अरण्यक नामक इस हाथी शावक को गत ३० जून को जिले के धुपगुड़ी के रामसाई इलाके से जलढाका नदी से बरामद किया गया था । इसके बाद इसे गोरुमारा अभ्यारण के धुपझोरा के कैंप में रखा गया था। वन दफ्तर के इन विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार अरण्यक को दूध पिलाने की लिए उसे फूलमती नामक पालतू हथिनी के पास रखा गया था किंतु इस हथिनी को ख़ुद का एक बच्चा होने की वजह से उसने अरण्यक को दूध पिलाने से मना कर दिया जिसके वजह से शारीरिक रूप से कमजोर हो चुके अरण्यक ने कल रात दम तोड़ दिया। घटना के सन्दर्भ में जिला वन अधिकारी तापश दास ने बताया की माँ का दूध नही मिलाने की वजह से अरण्यक के लिबर व किडनी ख़राब हो चुके थे जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई।
अरण्यक की इस मौत की वजह से वन प्राणियों की रक्षा करने पर जोर देने वाले संगठनो ने जिला वन विभाग की कार्य शैली पार्ट प्रश्न खडा करना शुरू कर दिया है । गौरे तलब है की पिचले दो वर्षों हाथी शवाक की मौत का यह तीसरा मामला है। इस से पहले सितम्बर २००८ व जनवरी २००८ में क्रमश गणेशी व कोजागर नामक हाथी शावक की मौत हो गई थी ।

Saturday, August 15, 2009

छावनी में हाथी मृत पाया गया




आज तड़के बानरहाट थाना अधीन बिन्नागुरी सैन्य छावनी में स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल के नजदीक एक मादा हाथी के मिट पाये जाने से इलाके में कोहराम मच गया। घटना की जानकारी मिलते ही जलपाइगुरि वन विभाग के अधिकारी घटना स्थल पर पहुच गए और मामले की जांच शुरू कर दी । वन विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मृत हाथी की उम्र लगभग २८ से ३० साल है । हाथी के मौत के कारणों के सन्दर्भ में जानकारी देते हुए एक अधिकारी ने बताया की प्राथमिक जांच से यह पता चलता है की बिजली का झटका लगाने की वजह से ही हाथी की मौत हुयी है क्यों की घटनास्थल पर बिजली के तार प्राप्त हुए है किंतु सही कारणों की जानकारी हाथी के पोस्टमार्टम के बाद ही हो पाएगी ।

Monday, August 10, 2009

तृंका के आन्दोलन की वजह से सौमिक को मिला पद भार

बानरहाट तृणमूल कांग्रेस द्वारा बानरहाट एक नंबर ग्राम पंचायत में ग्राम रोजगार सेवक की नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन पर उतरने की चेतावानी को नज़र में रखते हुए सौमिक भट्टाचार्य को ग्राम सेवक के पद पर नियुक्त कर लिया गया। एक लम्बी लडाई के बाद इस नौकरी को पाकर सौमिक व उसके परिवार के सदस्यों में खुशी की लहर दौर गई।
गौरतलब है की उक्त युवक को ३१/०७/२००८ को बानरहाट थाना अधीन एक नम्बर ग्राम पंचायत में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के तहत ग्राम सेवक के पद पर नियुक्त करने का आदेश धुपगुरी प्रखंड के विकाश पदाधिकारी ने जारी किया था। किंतु किन्ही अज्ञात कारणों की वजह से इस ग्राम पंचायत में उक्त युवक को इस पद को ग्रहण करने नही दिया जा रहा था। अपनी इस आप बीती के सन्दर्भ में सौमिक ने बताया की इस नौकरी के पाते ही उसने अपने परिवार के लिए कई सपने संजोये थे । किंतु ग्राम पंचायत द्वारा मना किए जाने की वजह से वह मायुश हो गया था और उसने मदद के लिए सभी प्रसासनिक आधिकारियों से गुहार भी लगाई थी किंतु नतीजा सिफर ही निकला था। अंत में उसने बानरहाट युवा तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्तायों से मदद की अपील की जिसकी वजह से वह आज हकीकत में इस पद को प्राप्त कर सका। सौमिक ने इन कार्यकर्तायों को उनके सहयोग के लिए धन्यबाद भी दिया।
सौमिक की इस लड़ाई में सहयोग करने वाले युवा नेता नयन दता ने बताया की माकपा संचालित इस पंचायत के प्रधान राजनैतिक उद्देश्यों से प्रेरित हो कर सौमिक को उसके अधिकारों से वंचित कर रहे थे इस लिए तृणमूल कांग्रेस ने उनके ख़िलाफ़ आन्दोलन पर जाने की चेतावनी दी थी जिसके तहत आज सुबह ही कार्यकर्तायों ने पंचायत कार्यालय में ताला लगा दिया था किंतु पुलिस व प्रखंड के विकास पदाधिकारी द्वारा आज ही सौमिक को नियुक्त करने के आश्वासन के बाद यह आन्दोलन वापस ले लिया गया जिसके पश्चात् सौमिक को उसके पद का भार सौंप दिया गया। इस पुरे प्रकरण के सन्दर्भ में पंचायत के प्रधान से सम्पर्क करने का प्रयास करने के बावजूद संपर्क न हो सका।

Sunday, August 9, 2009

काठालगुरी चाय बागान की लड़की मालदा से बरामद

सात वर्षों से थी लापता
एक लम्बे अरसे से बंद पड़े काठालगुरी चाय बागान की एक लड़की को आज मालदा से बरामद कर उसके घर वालों को सौंप दिया गया । बरामद लड़की का नाम सुष्मिता दोरजी (१५ ) बताया जा रहा है एव वह पिछले सात वर्षों से लापता थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार सुष्मिता मालदा के एक घर में नौकर का काम कर रही थी। पुलिस के सूत्रों के हवाले मिली जानकारी के अनुसार सात वर्ष पहले सुष्मिता महिला व शिशुओं की तस्करी करने वाले गिरोह के जाल में फँस कर पैसा कमाने के लालच में पहले कर्सेंग के एक घर में काम का रही थी । उसके बाद वह मालदा भेज दी गई । किंतु बानारहाट तृणमूल कांग्रेस के कार्य कर्ताओं की सूझ बुझ से उसे बरामद कर लिया गया। उल्लेखनीय है डूआर्स के चाय बागानों में आर्थिक संकट से ग्रस्त श्रमिकों को पैसे का लालच देकर महिलाओं व बच्चों की तस्करी करने वालों का गिरोह इन इलाकों में काफ़ी सक्रिय हो गया है जिसपर लगाम लगाने पर प्रशासन पुरी तरह नाकाम रहा है।